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कविता जो करती है व्यक्त, अव्यक्त भावों को बड़ी सहजता से, जो खोलती है राह नित नयी और करती है मजबूर कुछ कह जाने को

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आओ आपको रूबरू कराएं कवि और उनकी कविताओं से

Posted On: 10 May, 2013 Others में

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poetryकहते हैं कविताएं सबकी समझ में नहीं आतीं, सबके बस की बात नहीं हैं. यहां इस अवधारणा में थोड़े से बदलाव की जरूरत है. कविताएं क्या हैं, सामान्य बातों से अलग एक भावनात्मक उद्वेग, अपनी भावनाओं को कहने का एक माध्यम हैं कविताएं. भाषा, क्षेत्र, स्वरूप, शिक्षा, साहित्य से इसका नाता बाद में जुड़ता है, सबसे पहले और सही मायनों में तो यह भावनाओं की एक मूक अभिव्यक्ति ही हैं. यह किसी भी भाषा, किसी भी बोली में हो सकती हैं और कोई भी इसे लिख सकता है. यह एक गलत अवधारणा है कि कविता केवल पढ़े-लिखे चिंतक, विचारक और भाषा के विद्वान् ही लिख सकते हैं. लोकगीत इसका उदाहरण है, ये भी एक प्रकार से कविता का ही एक स्वरूप है. हर क्षेत्र और बोली में कोई न कोई प्रसिद्ध लोकगीत जरूर होता है. वह समृद्ध साहित्य का हिस्सा नहीं है पर इस भावनात्मक अभिव्यक्ति को भी मान्यता प्राप्त है.


यहां यह सब इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि हम कविताओं के लिए लोगों की इस आम राय को तोड़ना चाहते हैं कि यह केवल कुछ सीमित वर्ग की पसंदगी है. इसे समझना और पसंद करना सबके बस की बात नहीं. आजादी के दौरान और उसके बाद के वक्त से लेकर अब तक इसके प्रारूप में कई परिवर्तन हुए. विशेषकर आजादी के दौरान यह स्वतंत्रता सेनानियों के लिए देश को आजादी के लिए जगाने वाला एक सशक्त माध्यम साबित हुआ. सुभद्रा कुमारी चौहान, महादेवी वर्मा आदि ऐसे स्वतंत्रता सेनानी कवि थे जो अपनी कविताओं के द्वारा लोगों में आजादी की अलख जगाया करते थे. ये कविताएं सरल शब्दों में, सरल शैली की होती थीं. हालांकि काल और विधा में कविताएं कालों और विधाओं में बंटी हैं पर इससे उनकी जटिलता और सरलता का कोई संबंध नहीं है. उस वक्त की वह विधा हमारे लिए आज मुश्किल लगती है पर उस वक्त वही चलन में था, वही आसान समझ थी. एक दौर था जब तुकबंदी के बिना कविता, कविता मानी ही नहीं जाती थी. जटिल शब्द, अलंकारों से परिपूर्ण कविताएं ही कविताएं मानी जाती थीं. शायद कविताओं की यही सोच उसे आम लोगों से अलग करती थीं. पर आज अगर हम गौर करें तो नए दौर की कविताओं में ऐसे कोई बंधन नहीं रह गए गए हैं. आपको कई ऐसी कविताएं मिलेंगी जो आम बोलचाल की भाषा-सी प्रतीत होती हैं. पर ये कविताएं हैं क्योंकि इनमें भावनाएं हैं.


इसे आम लोगों से दूर होने का एक और कारण हो सकता है कि कई अच्छी कविताएं शायद हमने पढ़ी ही नहीं होगी. हमारे कवि और उनकी कविताएं भी एक प्रकार की धरोहर हैं. भावनाओं के इस माध्यम से हर किसी को जुडने का अधिकार होना चाहिए. इस मंच पर कोशिश रहेगी कि कविता-प्रेमी पाठकों की प्रसिद्ध कवियों की कविताएं पढ़ने की क्षुधा की पूर्ति भी करें और आम लोगों को भी कविताओं से जोड़ सकें. इसके स्वरूप और कविताओं का चयन क्रमवार अंकों में पाठक समझ जाएंगे. उम्मीद है यह अपने आशय में सफल होगा.


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